पंचानन सिंह बगहा पश्चिमी चंपारण बिहार।
रामनगर/बगहा। बहुचर्चित विजय सहनी हत्याकांड में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने मामले में दोषी पाए गए पांच आरोपितों महफूज अंसारी, राजकिशोर महतो, तेतर राम उर्फ साधु, श्री मुशहर और गीता देवी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।यह मामला रामनगर थाना कांड संख्या 189/2022 से संबंधित है। घटना 1 मई 2022 की है। मृतक विजय सहनी की पत्नी आशा देवी के आवेदन पर 4 मई 2022 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।पोखरा विवाद सुलझाने के बहाने बुलाया था
अभियोजन के अनुसार, विजय सहनी को पोखरा विवाद सुलझाने के बहाने फोन कर बुलाया गया था। इसके बाद वह बाइक से घर से निकले, लेकिन वापस नहीं लौटे। काफी देर तक घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। जब कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस को इसकी सूचना दी गई।घटना के करीब सात दिन बाद पुलिस ने आरोपित महफूज अंसारी और तेतर राम की निशानदेही पर गोवर्धना जंगल स्थित एक गड्ढे से विजय सहनी का शव बरामद किया। शव की पहचान मृतक की अंगूठी और घड़ी के आधार पर की गई।10 गवाहों के बयान और कई साक्ष्य रहे अहम
पुलिस ने अनुसंधान पूरा करने के बाद आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाहों को अदालत में पेश किया गया। इनमें मृतक की पत्नी आशा देवी, पुत्र राहुल कुमार सहनी, चिकित्सक डॉ. विनय कुमार और अनुसंधानकर्ता संतोष कुमार जायसवाल प्रमुख रहे।अभियोजन पक्ष ने अदालत में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट, कॉल डिटेल, बरामद मोबाइल फोन और बाइक समेत कई महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किए।
संपत्ति के लालच में हत्या की साजिश का आरोप
अभियोजन के अनुसार, संपत्ति के लालच में विजय सहनी की बहन गीता देवी ने हत्या की साजिश रची थी। मामले में अन्य आरोपितों की भी भूमिका सामने आई थी। अभियोजन पक्ष ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपों को साबित करने का दावा किया।
लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने अदालत के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि मामले के मुख्य आरोपी अशोक यादव को भी अदालत ने दोषी करार दिया है। अशोक यादव की सजा पर फैसला 11 सितंबर को सुनाया जाएगा।
फैसले को माना जा रहा महत्वपूर्ण
बहुचर्चित हत्याकांड में अदालत के इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर संपत्ति विवाद और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े अपराधों के मामलों में इसे कड़ा संदेश देने वाला फैसला माना जा रहा है।
