पंचानन सिंह बगहा पश्चिमी चंपारण बिहार।
बगहा। शनिवार 25 जुलाई को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष कि देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास की शुरुआत होने जा रही है ,कई साल बाद इस वर्ष चातुर्मास पूरे 120 दिन तक रहेगा। शुक्रवार 20 नवम्बर को देवउठनी एकादश पर चातुर्मास का समापन होगा। इस दौरान भगवान श्री हरि विष्णु जहाँ योगनिद्रा ये रहेंगे तो जगत का पालन पोषण का प्रभार देवाधिदेव महादेप के पास रहेगा।शास्त्री अंकित उपाध्याय के अनुसार एकादशी पर अमृत सिद्धियोग, शिवद्धास योग, ब्रह्मयोग, इन्द्र योग, सूर्य और उच्च के गुरु का पुष्य नक्षत्र में विराजमान होना जैसे कई दुर्लभ और शुभ योगो का संयोग बन रहा है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। उनके विश्राम काल के दौरान सृष्टि के संचालन की जिम्मेवारी भगवान शिव सम्भालते है। इसलिए चार महीनो की विशेष तप, भक्ति और आत्मसंयम काल माना गया है।वही गोचर काल पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष कि एकादशी तिथी के शुरुआत शुक्रवार 24 जुलाई को सुबह 10 बजकर 09 मिनट पर होगी। एकादशी का समापन शनिवार 25 जुलाई को सुबह 10:57 बजे होगा।उदया तिथी के अनुसार देवशयनी एकादशी का प्रत 25 जुलाई को ही किया जाएगा। एकादशी व्रत का पारण रविवार 26 जुलाई को सुबह 5:30 बजे से सुबह 8.22 बजे के मध्य में किया जाएगा।चातुर्मास के दौरान पड़ने वाले प्रमुख पर्व – चातुर्मास के दौरान श्रवण माह से भगवान शिव और विष्णु की अराधना की जाती है। साथ ही रक्षाबंधन का पर्व होता है। भाद्रपद (भादो) में श्री कृष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी का प्रमुख त्योहार आता है। इसी काल में अश्विनी (क्वार) माह में पितृपक्ष, शारदीय नवरात्र और विजयादशमी पड़ती है। कार्तिक माह में धन त्रयोदशी दीपावली के बाद अंतिम दिन देवोत्थान एकादशी और तुलसी विवाह किया जाता है।
