सीमा की आवाज बनेगा भारत-नेपाल पत्रकार संघ, आपदा पीड़ितों की मदद का लिया संकल्प
पंचानन सिंह बगहा पश्चिमी चंपारण बिहार।
बगहा। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने और दोनों देशों के बीच सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने को लेकर रविवार को इंडो-नेपाल बॉर्डर पत्रकार संघ की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बगहा-2 प्रखंड के देवरिया तरूअनवा पंचायत भवन में आयोजित बैठक में भारत और नेपाल के दर्जनों पत्रकारों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता संघ के संयोजक माधवेन्द्र पांडेय ने की, जबकि संचालन संजय पांडेय ने किया।बैठक की शुरुआत नेपाल में हाल में आई प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। पत्रकारों ने दो मिनट का मौन रखकर मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा आपदा से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि नेपाल में आई आपदा का असर सीमावर्ती क्षेत्रों पर भी पड़ा है। ऐसे समय में भारत और नेपाल के लोगों के बीच सहयोग और मानवीय संवेदना को मजबूत करना जरूरी है।बैठक में निर्णय लिया गया कि इंडो-नेपाल बॉर्डर पत्रकार संघ की ओर से नेपाल के बाढ़ पीड़ितों की हरसंभव सहायता की जाएगी। संघ के सदस्य आपदा प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए सहयोग जुटाने की दिशा में भी पहल करेंगे।बैठक को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार संजय पांडेय ने कहा कि पत्रकारों की जिम्मेदारी केवल खबर प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है। सीमावर्ती इलाकों में सड़क, पुल, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवागमन, बाढ़-कटाव और सुरक्षा जैसी समस्याओं को सरकार एवं संबंधित अधिकारियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना भी पत्रकारों का दायित्व है। संघ के माध्यम से भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र की जमीनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा।संघ के अध्यक्ष कौशल कुमार ने संगठन के आगामी चुनाव को लेकर पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संघ सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाएगा।बैठक में पत्रकारों ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते हैं। खुली सीमा के कारण दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के बीच गहरा जुड़ाव है। ऐसे में किसी भी आपदा या संकट की घड़ी में एक-दूसरे के साथ खड़ा होना दोनों देशों की साझा जिम्मेदारी है।पत्रकारों ने संकल्प लिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों की आवाज को मजबूती से उठाने के साथ-साथ आपदा, पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर भी संयुक्त पहल की जाएगी। बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई और संघ की आगामी कार्ययोजना पर सहमति बनी।
