बगहा/मधुबनी। हनुमत जन्मोत्सव के तहत शुभाश्रम हनुमानगढ़ी में ‘स्त्री संघर्ष और अधिकार : वर्तमान एवं भविष्य की राह’ विषय पर प्रख्यात लेखिका, आलोचक एवं स्त्रीवादी चिंतक डॉ. सुजाता का व्याख्यान आयोजित हुआ।
व्याख्यान में डॉ. सुजाता ने कहा कि स्त्री उत्थान के लिए पंडिता रमाबाई, रुकैया शेखावत हुसैन और मीरा के योगदान को याद रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी के पीठाधीश्वर अखिलेश शांडिल्य के नेतृत्व में शुभाश्रम जैसे आध्यात्मिक केंद्र में स्त्री अधिकारों और उनके संघर्षों पर विमर्श होना महत्वपूर्ण पहल है। इस दौरान उन्होंने मनुवादी संस्कृति की आलोचना करते हुए स्त्री समानता और अधिकारों पर अपने विचार रखे।
पूर्व प्राचार्य पं. भरत उपाध्याय ने डॉ. सुजाता के साहित्यिक योगदान की चर्चा करते हुए बताया कि हिंदी के पहले सामुदायिक स्त्रीवादी ब्लॉग ‘चोखेर बाली’ से लेकर ‘अनन्तिम मौन’, ‘स्त्री निर्मिति’, उपन्यास ‘एक बटा दो’ और ‘आलोचना का स्त्री पक्ष’ जैसी कृतियों के माध्यम से उन्होंने स्त्री विमर्श को नई पहचान दी है। डॉ. सुजाता पिछले एक दशक से दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन कर रही हैं। उन्हें वर्ष 2022 में देवी शंकर अवस्थी सम्मान से सम्मानित किया गया था।
कार्यक्रम का संचालन निवेदिता शांडिल्य ने किया। मौके पर डॉ. अशोक कुमार पांडेय, डॉ. चतुरानन ओझा, गीता पांडेय, विनीता सिंह, मनोज कुमार, सरोज पांडेय सहित सैकड़ों बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।
