लोक परंपराओं से समृद्ध होती है सनातन संस्कृति, दांपत्य जीवन में आपसी सम्मान और विश्वास का विशेष महत्व
(पंचानन सिंह बगहा पश्चिमी चंपारण)…..
करवा चौथ दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। यह पर्व पति-पत्नी के बीच आपसी सम्मान, आत्मीयता और अटूट विश्वास को मजबूत करता है। उक्त बातें पं. भरत उपाध्याय ने करवा चौथ के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में तीज, चौथ और छठ जैसे पर्व लोक आस्था एवं परंपराओं के संवाहक हैं। गर्ग संहिता, शिवपुराण और भविष्यपुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में व्रतों के महत्व का वर्णन मिलता है। लोक परंपराएं भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखती हैं।
पं. उपाध्याय ने कहा कि करवा चौथ का निर्जला व्रत धैर्य, संयम और संकल्प का प्रतीक है। चंद्र दर्शन के साथ दांपत्य जीवन में सुख, शांति और प्रेम की कामना की जाती है। उन्होंने कहा कि सच्चा दांपत्य वही है, जहां पति-पत्नी सुख-दुःख में एक-दूसरे के सहयात्री बनें। आधुनिकता के दौर में यह पर्व पारिवारिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश देता है।
