पंचानन सिंह बगहा पश्चिमी चंपारण।
विभिन्न शास्त्रों में कार्तिक (दामोदर) मास का गुणगान इस प्रकार किया गया है “कार्तिक मास में भगवान दामोदर की अर्चना करनी चाहिए और प्रतिदिन दामोराष्टक आरती करनी चाहिए। सत्यव्रत मुनि द्वारा रचित दामोराष्टक भगवान दामोदर को आकर्षित करती है।” *(श्री हरि भक्ति विलास ― 2.16.198)*
भगवान श्री कृष्ण कहते हैं, “सभी पौधों में मुझे पवित्र तुलसी सबसे अधिक प्रिय है, सभी महीनों में मुझे कार्तिक सबसे प्रिय है, सभी तीर्थस्थलों में मुझे द्वारका सबसे प्रिय है और सभी तिथियों में मुझे एकादशी सबसे प्रिय है ।” *(पदम् पुराण : उत्तर खण्ड 112.3)*
10,000 गायों को दान करने से जितना पुण्य प्राप्त होता है, उतना कार्तिक मास में परम् भगवान श्री कृष्ण को केवल एक तुलसी पत्र देकर ही प्राप्त किया जा सकता है ।” *(स्कन्द पुराण)*
“अगर कोई इस महीने में भगवान श्री कृष्ण की थोड़ी सेवा भी कर लेता है तो भगवान उसे अपने धाम में वास दे देते हैं।”
“अगर कोई कार्तिक मास में भगवान श्री कृष्ण के मन्दिर में अल्प अवधि के लिए भी दिया जलाता है (दीप दान करता है), तो जो भी पाप उसने लाखों कल्पों (1 कल्प सौ युगों के बराबर होता है) में किए हैं, वो सभी नष्ट हो जाते हैं।”
“अगर कोई व्यक्ति पूरे कार्तिक मास में प्रतिदिन केवल एक बार आहार लेता है तो वह प्रसिद्ध, शक्तिशाली और वीर बन जाता है।”
“हे नारद ! मैंने स्वयं देखा है कि जो व्यक्ति कार्तिक मास में आंनदपूर्वक भगवद गीता पढ़ता है, वो जन्म-मृत्यु के चक्र से छूट जाता है।सभी उपहारों में, कार्तिक मास में दिया गया दीप श्रेष्ठ उपहार है। कोई भी उपहार इसके बराबर नहीं है।”
“सभी तीर्थों में स्नान करके और सभी प्रकार के दान देकर जो पुण्य प्राप्त होता है, वो कार्तिक में किये गए व्रत का पालन करने से होने वाले पुण्य का एक छोटा भाग भी नहीं होता है।”
स्कंदपुराण के अनुसार:
‘*मासानां कार्तिकः श्रेष्ठो देवानां मधुसूदनः। तीर्थ नारायणाख्यं हि त्रितयं दुर्लभं कलौ* अर्थात् भगवान विष्णु एवं विष्णुतीर्थ के सदृश ही कार्तिक मास को श्रेष्ठ और दुर्लभ कहा गया है।”
*न कार्तिसमो मासो न कृतेन समं युगम्। न वेदसदृशं शास्त्रं न तीर्थ गंगया समम्।* “जिस प्रकार युगों में सतयुग श्रेष्ठ है, शास्त्रों में वेद श्रेष्ठ हैं, नदियों में गंगा श्रेष्ठ है, उसी प्रकार महीनों में कार्तिक श्रेष्ठ है और यह भगवान श्री कृष्ण को सबसे प्रिय है।”
*(स्कन्द पुराण)*
कार्तिक, भगवान कृष्ण को दीप दिखाने का उत्सव है, और माता यशोदा द्वारा रस्सियों से ऊखल में बांधे गए भगवान कृष्ण (दामोदर) का गुणगान करने का मास है ।
कार्तिक या दामोदर मास सर्वोत्तम, पवित्र और अनंत महिमाओं से पूर्ण मास है । यह विशेषतः भगवान कृष्ण को अति प्रिय है और भक्त-वात्सल्य से परिपूर्ण है । इस मास में कोई भी छोटे से छोटा व्रत भी कई हज़ार गुना अधिक परिणाम देता है ।
हमें प्रामाणिक गुरु, साधु और शास्त्र के निर्देशन में रहकर भगवान के नाम, रूप, गुण तथा लीलाओं की महिमा का श्रवण, कीर्तन और स्मरण करना चाहिए। “परम विजयते श्रीकृष्ण संकीर्तनम” कलियुग में यह संकीर्तन आंदोलन (भगवान के नाम का जप और कीर्तन) मानवता के लिए परम वरदान है और यह भगवान से सीधे जुड़कर भगवदप्रेम विकसित करने की सर्वोत्तम सरल विधि है। इसीलिए सदा ही भगवान के नाम का जप करिए और ख़ुश रहिए।
