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शास्त्री नगर के पनसरावा बाबा परिसर में तीसरे दिन भी उमड़े श्रद्धालु, बीके अविता दीदी ने कहा— नजर बदलें तो नजारे बदल जाएंगे
पंचानन सिंह बगहा पश्चिमी चंपारण।
बगहा, पश्चिमी चंपारण। नवरात्र के पावन अवसर पर बगहा नगर के शास्त्री नगर स्थित पनसरावा बाबा परिसर में ब्रह्माकुमारी बहनों की ओर से आयोजित चैतन्य देवियों की भव्य झांकी का कार्यक्रम तीसरे दिन भी जारी रहा। झांकी के माध्यम से नारी शक्ति, आध्यात्मिक चेतना और मातृशक्ति के सम्मान का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और देवी स्वरूपों का दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की।
कार्यक्रम का शुभारंभ बगहा प्रखंड-एक के डुमरिया फॉर्म हाउस निवासी अर्पणा सिंह उर्फ बहुरानी एवं ब्रह्माकुमारी बहनों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर पश्चिमी चंपारण की बीके अविता दीदी, रेखा बहन, पूजा बहन, अन्नू बहन, मनीषा बहन, ज्योति बहन सहित ब्रह्माकुमारी बहनों की टीम मौजूद रही। कार्यक्रम के दौरान अर्पणा सिंह उर्फ बहुरानी एवं पत्रकार को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद उपस्थित लोगों ने मां दुर्गा की आरती की।
नारी शक्ति को पहचानने का दिया संदेश
बीके अविता दीदी ने कहा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से प्रत्येक वर्ष नवरात्र के पावन अवसर पर चैतन्य देवियों की झांकी प्रस्तुत की जाती है। इसका उद्देश्य लोगों को देवी स्वरूपों के आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराने के साथ अपने भीतर की शक्ति को पहचानने के लिए प्रेरित करना है।
उन्होंने कहा कि मां दुर्गा, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती शक्ति, समृद्धि एवं ज्ञान की प्रतीक हैं। हमें देवी स्वरूपों की आराधना के साथ अपने जीवन में भी उनके आदर्शों को अपनाना चाहिए। पिछले आठ दिनों से बहनें अष्टसिद्धि की प्राप्ति के उद्देश्य से तपस्या एवं उपवास कर रही हैं। लेकिन नारी शक्ति के प्रति सम्मान की भावना केवल नवरात्र के नौ दिनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि साल के प्रत्येक दिन महिलाओं, बहनों और बेटियों के प्रति हमारी दृष्टि और विचार उच्च होने चाहिए।
सोच बदलेगी तो बदलेगा समाज
बीके अविता दीदी ने कहा, “नजर को बदलें तो सारे नजारे बदल जाएंगे और अपनी सोच को बदलें तो किस्मत के सितारे बदल जाएंगे।” उन्होंने कहा कि चैतन्य देवियों की झांकी हमें नारी शक्ति के वास्तविक स्वरूप को समझने और अपने भीतर की आध्यात्मिक शक्ति को पहचानने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि धन अर्जित करने में पुरुषों की भूमिका हो सकती है, लेकिन धन की देवी मां लक्ष्मी हैं। इसी तरह ज्ञान की देवी मां सरस्वती और दुर्गुणों पर विजय की प्रतीक मां दुर्गा हैं। इन देवी स्वरूपों के माध्यम से समाज को यह समझने की जरूरत है कि नारी केवल सम्मान की पात्र ही नहीं, बल्कि शक्ति, ज्ञान और समृद्धि का आधार भी है।
उन्होंने शिवरात्रि और नवरात्र के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन पर्वों का संदेश स्वयं को जानने, अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने और बुराइयों से ऊपर उठने का है।

कार्यक्रम में प्रस्तुत चैतन्य देवियों की झांकी ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश देने के साथ महिलाओं के प्रति सम्मान, सकारात्मक सोच और सामाजिक चेतना का भाव जगाया। आयोजन में ब्रह्माकुमारी भाई-बहनों की सक्रिय सहभागिता रही।
