(मिथिलेश कुमार झा ब्यूरो चीफ सुपौल)
सुपौल ।सदर प्रखंड अंतर्गत ग्राम बीना बभनगामा के 69वें कोजागरा महोत्सव के पावन अवसर पर शरद पूर्णिमा की ठंडी और सुहानी रात्रि (25 अक्टूबर) को प्रसिद्ध मैथिली नाटक ‘हठआट परिवर्तन’ का ऐसा मनमोहक मंचन हुआ, जिसने हर दर्शक के दिल को छू लिया। नाटक की इतनी जीवंत और ऊर्जावान प्रस्तुति रही कि पूरी रात दर्शक अपनी सीटों पर मुग्ध होकर झूमते रहे और समय का पता ही नहीं चला। सामाजिक मूल्यों, देशभक्ति और गहरे संस्कारों से ओत-प्रोत इस नाटक की कथावस्तु सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर कृष्ण चंद्र प्रताप (रोशन झा) के अनुशासित और संघर्षशील परिवार की कहानी कहती है ब्रिगेडियर साहब का एक बेटा गोपाल (निकेत) देश की सरहद पर फौज में तैनात होकर शान बढ़ा रहा है, वहीं उनका दूसरा बेटा गिरधारी प्रताप (संजीव झा) बुरी संगति के भंवर में फंसकर परिवार और समाज की मर्यादा को भूल जाता है। नाटक में जब मित्र के छल और विश्वासघात से गिरधारी की आँखें खुलती हैं, तो वह दृश्य दर्शकों के भीतर तक उतर जाता है और आँखें नम कर देता है। अंततः, वही भटका हुआ बेटा फौज में कमांडर बनकर लौटता है और अपने परिवार के साथ-साथ पूरे समाज के सामने एक प्रेरणादायक और उज्ज्वल उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस मर्मस्पर्शी नाटक में सभी कलाकारों ने अपने प्राण फूँक दिए और हर एक का अभिनय अत्यंत सराहनीय रहा। विशेष तौर पर, गिरधारी प्रताप की भूमिका में संजीव झा ने अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों को हँसाया भी और उनकी आँखें नम (रुलाया) भी कर दीं। इसके साथ ही, बाल कलाकार मास्टर उत्सव की नन्हीं और प्यारी भूमिका ने भी दर्शकों का भरपूर स्नेह बटोरा और नाटक में एक अलग ही जान डाल दी। जीवन के गहरे संदेश देने वाले इस खूबसूरत नाटक के रचयिता आनंद झा हैं, जिसका यह ऐतिहासिक मंचन स्थानीय पुस्तकालय प्रांगण में संपन्न हुआ। महोत्सव के सफल आयोजन में समिति के अध्यक्ष बांके बिहारी मिश्र, कोषाध्यक्ष जितेंद्र कुमार झा और सचिव चंद्रशेखर झा सहित सभी सदस्य एवं ग्रामीण सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। समिति के सदस्यों में विभास कुमार झा, राकेश कश्यप, पंकज कुमार झा, आदित्य शेखर, आलोक आनंद, नितेश आजाद, आशीष कुमार झा, आशुतोष कुमार, सचिन कुमार, हेमशंकर चौधरी, जितेंद्र कुमार गुड्डू और हरिशंकर चौधरी शामिल हैं। नाट्य मंचन के निर्देशन की जिम्मेदारी नरेंद्र ठाकुर संभाल रहे हैं। वहीं, उपनिदेशक नवीन कुमार मिश्र के साथ कृष्णानंद योगी और राजेश कुमार भी आयोजन में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि कोजागरा महोत्सव गांव की पहचान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यही वजह है कि वर्षों से यह आयोजन लोगों को आपस में जोड़ता आ रहा है। तीन दिवसीय इस महोत्सव के माध्यम से एक बार फिर बीणा बभनगामा में मैथिली नाट्य कला और पारंपरिक संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिल रही है।
