विजयादशमी की गरिमा बनाए रखने के लिए मांस-मदिरा से परहेज करें : पं. भरत उपाध्याय
बगहा। पूर्व प्राचार्य एवं प्रख्यात पर्यावरणविद् पंडित भरत उपाध्याय ने विजयादशमी के अवसर पर लोगों से पर्व की धार्मिक गरिमा बनाए रखने और मांस-मदिरा से परहेज करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शारदीय नवरात्र शक्ति, संयम, आत्मशुद्धि और सदाचार का महापर्व है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के बाद विजयादशमी मनाई जाती है।पं. उपाध्याय ने कहा कि नवरात्र के दौरान करोड़ों श्रद्धालु व्रत, पूजा-पाठ और सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं। घरों से लेकर मंदिरों तक भक्तिमय वातावरण रहता है। ऐसे पावन अवसर पर मदिरा की दुकानों का खुले रहना श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय है। सरकार को धार्मिक आस्था और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए नवरात्र एवं विजयादशमी जैसे पर्वों पर शराब की दुकानों को बंद रखने की मांग पर संवेदनशीलता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की आराधना केवल दीप जलाने, चुनरी चढ़ाने और जयकारे लगाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके आदर्शों को जीवन में अपनाकर संयम, सदाचार, नारी सम्मान और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना ही पर्व की वास्तविक सार्थकता है। धार्मिक आस्था का सम्मान संवेदनशील निर्णयों और सकारात्मक आचरण से भी प्रदर्शित होना चाहिए।
