पं. भरत उपाध्याय ने दिया ‘मां, मान और संविधान’ की रक्षा का संदेश
#पंचानन सिंह बगहा पश्चिमी चंपारण #
मधुबनी। गंडक पार के चारों प्रखंडों में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन श्रद्धा, उत्साह और भावुक माहौल में संपन्न हुआ। पूर्व प्राचार्य पं. भरत उपाध्याय ने क्षेत्र के विभिन्न स्थानों का भ्रमण करने के बाद कहा कि मां दुर्गा की आराधना भारतीय संस्कृति में आस्था, श्रद्धा और विश्वास की गहरी जड़ों को दर्शाती है। विसर्जन के दौरान भक्तों में जहां मां के प्रति अटूट श्रद्धा दिखी, वहीं विदाई के क्षणों में भावुकता का माहौल भी रहा।
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से है। भारतीय संस्कृति में धर्म के प्रति संवेदना, त्याग, अनुष्ठान, संकल्प और विजय की भावना का विशेष महत्व है। यहां भूमि, गौ और गंगा को मां का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। जिस प्रकार मां अपने बच्चों का पालन-पोषण और संरक्षण करती हैं, उसी प्रकार भूमि, गौ और गंगा भी जीवन के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पं. उपाध्याय ने कहा कि देश का तिरंगा राष्ट्रीय गौरव, एकता, पहचान और सम्मान का प्रतीक है। इसी प्रकार संविधान देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने वाला सर्वोच्च आधार है। जिस तरह मंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र होता है, उसी तरह संविधान लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा का आधार है।

उन्होंने कहा कि ‘मां, मान और संविधान’ की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। मां के प्रति श्रद्धा, राष्ट्र के प्रति सम्मान और संविधान के प्रति निष्ठा को जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी लोगों से इन मूल्यों की रक्षा करने तथा इनके प्रति समर्पित रहने का संकल्प लेने की अपील की।
