वैदिक मंत्रोच्चार और ‘जय माता दी’ के उद्घोष से गूंजा गांव, श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हुई मां भगवती की आराधना
@@पंचानन सिंह बगहा पश्चिमी चंपारण।
बगहा। मां दुर्गा की भक्ति, आस्था और शक्ति की उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन रविवार को बगहा-1 प्रखंड की सिंगाड़ी पिपरिया पंचायत स्थित पिपरिया गांव में भक्तिमय माहौल देखने को मिला। मां भगवती के जयकारों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने भव्य कलश यात्रा निकाली। इसके बाद विधि-विधान एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कलश स्थापना कर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू की गई। पूरे गांव में ‘जय माता दी’ के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
श्रद्धा और उत्साह के साथ हुई पूजा-अर्चना
शारदीय नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भक्तों ने पूरे विधि-विधान के साथ मां भगवती की पूजा-अर्चना कर परिवार एवं समाज की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। नवरात्र को लेकर पूजा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। कहीं भक्ति गीतों की मधुर धुन सुनाई दे रही है, तो कहीं शंख ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां दुर्गा की आराधना की जा रही है। पूजा समिति और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा एवं उत्साह के साथ संपन्न कराए जा रहे हैं।
पुलिस बल की तैनाती, सुरक्षा व्यवस्था रही मुस्तैद
धार्मिक आयोजन के दौरान शांति एवं विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बगहा पुलिस बल की तैनाती की गई। पुलिस प्रशासन की सतर्कता के बीच पूजा कार्यक्रम संपन्न हुआ। पर्व के दौरान शांति, सौहार्द और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि श्रद्धालु निर्भीक होकर मां दुर्गा की आराधना कर सकें।
1982 से चली आ रही है पूजा की परंपरा
दुर्गा पूजा समिति, पिपरिया की स्थापना वर्ष 1982 में हुई थी। तभी से नवयुवक संघ के सदस्य एवं स्थानीय श्रद्धालु परंपरागत रूप से कलश यात्रा निकालकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा गांव की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी हुई है।

पूजा आयोजन को सफल बनाने एवं विधि-व्यवस्था बनाए रखने में दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष रितेश कुमार चौहान, कोषाध्यक्ष संदीप कुमार साह, सचिव नर्देश्वर ठाकुर सहित रलेश कुमार चौहान, विनय कुमार, अजित चौधरी, मुन्ना चौहान, रूपेश कुमार, अवधेश कुमार, दरोगा चौधरी, अनिष्ट साह, अशोक यादव समेत स्थानीय ग्रामीणों एवं गणमान्य लोगों की सक्रिय भूमिका रही।
